उल्लास का शुभारम्भ

मित्रवर,

विभिन्न तरह के दुखों को समझने, सुलझाने और उसके विषय में मार्गदर्शन करने के लिए बहुत सारे ब्लॉग उपलब्ध हैं, किन्तु सुख को बांटने और बढ़ाने के लिए कोई ब्लॉग मुझे अभी तक विशेष रूप से हिंदी भाषा में देखने को नहीं मिला है.

जबकि यह एक सर्वमान्य तथ्य है कि सुख के अनुभवों को एक दूसरे से बांटने से दूसरों के जीवन में सुख की वृद्धि होने के साथ साथ हमारे जीवन में भी सुख बढ़ता है.

अतएव इसी अभिप्रेरणा से, जिसका वास्तविक उद्गम हमारे माननीय कुलपति महोदय प्रो. गिरीश्वर मिश्र जी के विचार हैं, मैंने यह ब्लॉग मनोविज्ञान विभाग की तरफ से मानविकी एवं सामजिक विज्ञान विद्यापीठ, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के संरक्षण में तैयार किया है.

इस ब्लॉग के सदस्य सुख, स्वतः स्फूर्त आतंरिक अनुभूति (जिससे उनके जीवन में नयापन आया, किसी कार्य विशेष में सफलता मिली, समस्याओं का समाधान मिल पाया) तथा सुख के विषय में नवीनतम मनोवैज्ञानिक तकनीकी (जैसे कि जीवन में प्रेम कैसे बढ़ाएं, परिवारवालों के साथ मिलजुलकर कैसे रहें, निजी जीवन में खुशहाली कैसे लाएं, दया भाव कैसे उपजाएँ, बच्चों में सकारात्मक गुण कैसे विकसाएं आदि ) के विषय में नवीनतम निष्कर्ष और विचार एक दूसरे के साथ बांटेंगे.

इसी उद्देश्य के साथ यह ब्लॉग आप और हम सबके बीच सुख के साझेदारी के लिए समर्पित है.


सोमवार, 20 अक्टूबर 2014

मित्रों,

हिन्दी में अपना सन्देश टाइप करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें:

http://indiatyping.com/index.php/typing-tutor/hindi-typing-indic

इसके खुलने पर पर online hindi typing क्लिक करें और दिए गए बॉक्स में टाइप करना शुरू कर दे

इस पर टाइप करने के बाद cut/copy  करके ब्लॉग के  पोस्ट पर पेस्ट कर दें.

आप सबके लिए शुभकामनाएं
अरुण  

9 टिप्‍पणियां:

  1. हमारे इस प्रयाश के लिए आप सभी से सहयोग कि अपेकषा है।
    धन्यवाद

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  2. आहिस्ता चल जिंदगी अभी कई कर्ज चुकाना बाकी है।
    कुछ दर्द मिटाना बाकी है, कुछ फर्ज निभाना बाकी है।

    रफ्तार में तेरे चलने से कुछ रूठ गए, कुछ छुट गए।
    रुठों को मनाना बाकी है, रुठों को हसाना बाकी है।

    कुछ हसरतें अभी अधूरी हैं, कुछ काम करना अभी जरूरी है।
    ख्वाहिशें जो घुट गई इस दिल में, उनको दफनाना बाकी है।

    कुछ रिश्ते बनकर टूट गए, कुछ जूड़ते-जूड़ते छुट गए।
    उन टूटते-छूटते रिश्तों के ज़ख़्मों को मिटाना बाकी है।

    ऐ जिंदगी, तू आगे चल मैं आता हूँ, क्या छोड़ तुझे जी पाऊँगा?

    इन साँसो पर हक़ है जिनका, उनको समझाना बाकी है।

    आहिस्ता चल जिंदगी अभी कई कर्ज चुकाना बाकी है.............

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  3. सही शुरुआत मित्र. अपने लेखन शैली के माहिर दोस्तों के लिए नायब पृश्ठभूमि तैयार आपने।

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  4. इसमें कोई शक नहीं है की आज ब्लॉग अपने विचारो को शेयर करने का प्रमुख माध्यम है परंतु सुखद विचारो को शेयर करना एकदम नया....प्रसंनीय....स्वागतयोग्य....शुखद....सराहनीय....

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  5. Ham kisi mandir yaa masjid jane ke vajah,
    chale kisi rote huye ko hansate hai..

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