अच्छे प्रयास के
लिये साधुवाद।........कभी मैंने फेसबुक पर अपनी 2
वर्ष की पौत्री
के फोटो के साथ कमेंट लिखा था, उसे नीचे प्रस्तुत कर रहा हूँ, शायद प्रासंगिक लगे -
मेरी
पौत्री
श्रव्या - जिसके हॅस देने पर मैं जीवन के सारे उलझनो को भूल जाता हूँ.......किसी घरेलू बहस में अन्य पतियों की तरह ही जब मैं श्रीमती जी से हार जाता हूँ तब (मेरे सिखाने पर) अपनी तोतली बोली में यह मेरी पौत्री जब कहती है – “दादी बड़ी जीदी है....बअ बअ बअ बअ करती है” (दादी बड़ी जिद्दी है.....बर बर बर बर करती है), तब मैं विजयी महसूस करता हूँ किन्तु मजेदार बात यह है कि श्रीमती जी भी हारी हुई नही महसूस करती बल्कि मीठी झिड़की देने का ड्रामा करते हुये हर्षावेश मे पौत्री को गले लगा लेती हैं। ……. जीवन में आनन्द की खोज मे अन्धाधुन्ध भागदौड़ करने मे मशगूल हम लोग इन नेचुरल आनन्द के पलों को कमतर कर डालते हैं।.....प्रभु से प्रार्थना है कि वे हमे और आपके जीवन मे ऐसे नेचुरल आनन्द की वर्षा करें और हमे-आपको ऐसे आनन्द का आनन्द उठाने का सहूर अता फऱमावें...
आज
कुछ ङिप्रेसन के मूड मे मन किया कि इस "नेचुरल आनन्द" का पुनः स्मरण करूँ। आप भी आवश्यकता पड़ने पर इस "कोपिंग स्ट्रेटेजी" का उपय़ोग कर सकते हैं।......एक बार आपको पुनः शुभकामना- इस
"सहूर" के लिये...