उल्लास का शुभारम्भ

मित्रवर,

विभिन्न तरह के दुखों को समझने, सुलझाने और उसके विषय में मार्गदर्शन करने के लिए बहुत सारे ब्लॉग उपलब्ध हैं, किन्तु सुख को बांटने और बढ़ाने के लिए कोई ब्लॉग मुझे अभी तक विशेष रूप से हिंदी भाषा में देखने को नहीं मिला है.

जबकि यह एक सर्वमान्य तथ्य है कि सुख के अनुभवों को एक दूसरे से बांटने से दूसरों के जीवन में सुख की वृद्धि होने के साथ साथ हमारे जीवन में भी सुख बढ़ता है.

अतएव इसी अभिप्रेरणा से, जिसका वास्तविक उद्गम हमारे माननीय कुलपति महोदय प्रो. गिरीश्वर मिश्र जी के विचार हैं, मैंने यह ब्लॉग मनोविज्ञान विभाग की तरफ से मानविकी एवं सामजिक विज्ञान विद्यापीठ, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के संरक्षण में तैयार किया है.

इस ब्लॉग के सदस्य सुख, स्वतः स्फूर्त आतंरिक अनुभूति (जिससे उनके जीवन में नयापन आया, किसी कार्य विशेष में सफलता मिली, समस्याओं का समाधान मिल पाया) तथा सुख के विषय में नवीनतम मनोवैज्ञानिक तकनीकी (जैसे कि जीवन में प्रेम कैसे बढ़ाएं, परिवारवालों के साथ मिलजुलकर कैसे रहें, निजी जीवन में खुशहाली कैसे लाएं, दया भाव कैसे उपजाएँ, बच्चों में सकारात्मक गुण कैसे विकसाएं आदि ) के विषय में नवीनतम निष्कर्ष और विचार एक दूसरे के साथ बांटेंगे.

इसी उद्देश्य के साथ यह ब्लॉग आप और हम सबके बीच सुख के साझेदारी के लिए समर्पित है.


गुरुवार, 23 अक्टूबर 2014

'कोपिंग स्ट्रैटेजी' के सन्दर्भ में प्रोफ़ेसर अरुण तिवारी जी का अनूठा विचार

अच्छे प्रयास के लिये साधुवाद।........कभी मैंने फेसबुक पर अपनी 2 वर्ष की पौत्री के फोटो के साथ कमेंट लिखा था, उसे नीचे प्रस्तुत कर रहा हूँ, शायद प्रासंगिक लगे -

मेरी पौत्री श्रव्या - जिसके हॅस देने पर मैं जीवन के सारे उलझनो को भूल जाता हूँ.......किसी घरेलू बहस में अन्य पतियों की तरह ही जब मैं श्रीमती जी से हार जाता हूँ तब (मेरे सिखाने पर) अपनी तोतली बोली में यह मेरी पौत्री जब कहती है – “दादी बड़ी जीदी है....बअ बअ बअ बअ करती है(दादी बड़ी जिद्दी है.....बर बर बर बर करती है), तब मैं विजयी महसूस करता हूँ किन्तु मजेदार बात यह है कि श्रीमती जी भी हारी हुई नही महसूस करती बल्कि मीठी झिड़की देने का ड्रामा करते हुये हर्षावेश मे पौत्री को गले लगा लेती हैं। ……. जीवन में आनन्द की खोज मे अन्धाधुन्ध भागदौड़ करने मे मशगूल हम लोग इन नेचुरल आनन्द के पलों को कमतर कर डालते हैं।.....प्रभु से प्रार्थना है कि वे हमे और आपके जीवन मे ऐसे नेचुरल आनन्द की वर्षा करें और हमे-आपको ऐसे आनन्द का आनन्द उठाने का सहूर अता फऱमावें...

आज कुछ ङिप्रेसन के मूड मे मन किया कि इस "नेचुरल आनन्द" का पुनः स्मरण करूँ। आप भी आवश्यकता पड़ने पर इस "कोपिंग स्ट्रेटेजी" का  उपय़ोग कर सकते हैं।......एक बार आपको पुनः शुभकामना- इस "सहूर" के लिये...

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