पाश्चात्य मनोविज्ञान प्राय: हमे सुख बढ़ाना सिखाता है। किन्तु, इसके उलट अपने देश का मनोविज्ञान हमे दुख का भी महत्व समझाता है। तभी तो महर्षि अरविंद दुख को एक हथौड़ा कहते हैं जो कि हमारी गैर जागरूकता को दूर करके चैतन्य भाव का विकास करता है। मन को एक तरह की शांति से युक्त कर देता है।
यानी कि दुख मे भी हम उल्लास की संभावना ढूंढ सकते हैं।
अरुण